In woods of God Realization – 477

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From “In woods of God Realization” Granth – Lecture 7 (Lecture delivered at the Hermetic Brotherhood Hall, San Francisco, on December 24, 1902) My Alter Egos, My Other Selves,   Rama wants to say a few words about Moses. When Moses heard a voice in the bush, he found a hissing snake beside him. Moses was frightened out of his wits; he trembled; his breast was throbbing; all the blood almost curdled in his veins; he was undone. A voice […]

गीता प्रवचन – 477

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! अन्त में उपस्थित गीता-अनुयायी जनता से ‘हृदय-सम्राट् श्रीगुरुदेव स्वामी जी’ ने अनुरोध पूर्वक कहा कि काफ़ी ज़िन्दगी तो व्यतीत हो चुकी है, अब और अधिक ज़िन्दगी इन्हीं सांसारिक व्यर्थ की कामनाओं एव धन्धों में ही न खोकर अधिक से अधिक समय अपने इष्टदेव का कोई भी महामन्त्र लेकर उस के जाप में लग जाओ । सचमुच, कलियुग में जाप से अधिक सुगम अन्तःकरण को निर्मल […]

In woods of God Realization – 476

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From “In woods of God Realization” Granth – Lecture 7 (Lecture delivered at the Hermetic Brotherhood Hall, San Francisco, on December 24, 1902) My Alter Egos, My Other Selves, Freedom and happiness you achieve by realizing the true Self, the real ― ’I am,’ which is the same yesterday, today, and forever. The pure ― ’I am’ is untouched by time, because in the previous birth the pure ― ’I am’ ― remained the same. It is not sullied by […]

गीता प्रवचन – 476

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! कुछ लोग प्राय: इस दृष्टि से कुछ समय पश्चात् ही जाप करना छोड़ बैठते हैं कि जाप में मन तो एकाग्र होता नहीं । तन को तो जैसे-कैसे हम बिठा लेते हैं परन्तु मन बन्दर की भांति इधर-उधर उछलता-कूदता रहता है, अत: पूर्ण एकाग्रता बन नहीं पाती और परिणामस्वरूप नाम-जाप करने में रस भी नही आता । परन्तु ऐसा करना नितान्त अनुचित है । मन […]

In woods of God Realization – 475

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From “In woods of God Realization” Granth – Lecture 7 (Lecture delivered at the Hermetic Brotherhood Hall, San Francisco, on December 24, 1902) My Alter Egos, My Other Selves, Here is a blackboard, a hard, solid substance. Suppose you rub the blackboard and rub and scrub it again. Can you make it transparent? No. Take a looking-glass; it may be soiled, dusty or dirty, but when you clean it, it is transparent. You have not made it transparent by your […]

गीता प्रवचन – 475

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! (३) जिस से यह समस्त जगत् अस्तित्व में आया है, जिस के सहारे टिका हुआ है, ऐ बुद्धिमान् ! सुन रख कि उसी में ही यह सब चराचर सृष्टि विलीन हो जायेगी । सिद्धान्त अटल है – जो वस्तु जहाँ से बनी है देर चाहे सवेर उसी में ही विलीन हो जाती है । यह सृष्टि भगवान् जी के पाँच तत्त्वों से बनी है अत: […]