गीता प्रवचन – 2

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – गीता सुगीता कर्त्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिःसृता ।। भगवान् श्रीकृष्ण का ध्यान वसुदेवसुतं देव कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्‌गुरुम् ।। अर्थ – ‘जो वासुदेव जी के पुत्र’ दिव्य-रूपधारी,कंस और चाणूर का  कचूमर निकालने वाले और देवकी जी के लिए परम आनन्दस्वरूप हैं, उन जगद्गुरु भगवान् श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ । ” मूकं करोति वाचालं पङ्गु लङ्घयते गिरिम् । यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम् ।। अर्थ – ‘जिन की कृपा गूंगे को […]

गीता प्रवचन – 1

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिःसृता ।। गीता-महिमा ”जब-जब संकट पड़ते हैं, तब-तब संकट टालने के लिए हम गीता के पास दौड़ जाते हैं और उससे आश्वासन पाते हैं । हमें गीता को इस दृष्टि से पढ़ना है । वह हमारे लिए सद्‌गुरुरूप है, माता-रूप है और हमें विश्वास रखना चाहिये कि उस की गोद में सिर रखने से हम सही-सलामत रहेंगे । गीता के द्वारा हम अपनी तमाम धार्मिक उलझनें सुलझावेंगे […]

In woods of God Realization – 1

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From “In woods of God Realization” Granth “Tattva-Masi” (That Thou Art) Om! Om! Om! Swami Rama Tirtha, previously known as Gossain Tirtha Rama, was born in 1873, at Murariwala, a village in the district of Gujranwala, Punjab, India. His mother passed away when he was but a few days old and he was brought up by his elder brother, Gossain Gurudas. As a child, Rama was very fond of listening to recitations from the Holy Scriptures and attending Kathas. He […]