गीता प्रवचन – 477

Posted Posted in Hindi Blog

“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! अन्त में उपस्थित गीता-अनुयायी जनता से ‘हृदय-सम्राट् श्रीगुरुदेव स्वामी जी’ ने अनुरोध पूर्वक कहा कि काफ़ी ज़िन्दगी तो व्यतीत हो चुकी है, अब और अधिक ज़िन्दगी इन्हीं सांसारिक व्यर्थ की कामनाओं एव धन्धों में ही न खोकर अधिक से अधिक समय अपने इष्टदेव का कोई भी महामन्त्र लेकर उस के जाप में लग जाओ । सचमुच, कलियुग में जाप से अधिक सुगम अन्तःकरण को निर्मल […]

गीता प्रवचन – 476

Posted Posted in Hindi Blog

“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! कुछ लोग प्राय: इस दृष्टि से कुछ समय पश्चात् ही जाप करना छोड़ बैठते हैं कि जाप में मन तो एकाग्र होता नहीं । तन को तो जैसे-कैसे हम बिठा लेते हैं परन्तु मन बन्दर की भांति इधर-उधर उछलता-कूदता रहता है, अत: पूर्ण एकाग्रता बन नहीं पाती और परिणामस्वरूप नाम-जाप करने में रस भी नही आता । परन्तु ऐसा करना नितान्त अनुचित है । मन […]

गीता प्रवचन – 475

Posted Posted in Hindi Blog

“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! (३) जिस से यह समस्त जगत् अस्तित्व में आया है, जिस के सहारे टिका हुआ है, ऐ बुद्धिमान् ! सुन रख कि उसी में ही यह सब चराचर सृष्टि विलीन हो जायेगी । सिद्धान्त अटल है – जो वस्तु जहाँ से बनी है देर चाहे सवेर उसी में ही विलीन हो जाती है । यह सृष्टि भगवान् जी के पाँच तत्त्वों से बनी है अत: […]

गीता प्रवचन – 474

Posted Posted in Hindi Blog

“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! तो स्पष्ट हुआ कि भगवान् ही सच्चाई हैं, सृष्टि कदापि-कदापि नहीं । जब यह सत्य है तो कितनी मूर्खता है तेरा मिथ्या नाम-रूपों की ओर भागना-दौड़ना अथवा उनके संकल्प- विकल्प करना । इस प्रकार यह प्रथम साधन है मन को समझाने का अथवा नाम-रूपों से हटा कर भगवान् जी की ओर लगाने किंवा जाप करते हुए एकाग्रता लाभ करने का । (२) समस्त नाम-रूप भगवान् […]

गीता प्रवचन – 473

Posted Posted in Hindi Blog

“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! जाप करते समय मन को बार-बार यही समझाना चाहिये – ‘हे मन ! कहाँ भागता है?  जरा ध्यान से देख – (१) सब कुछ तो उस एक भगवान् से ही निकला है अथवा जितनी यह अनेकता है एकमात्र भगवान् जी से ही प्रकट हुई है । (२) जिन प्राणी-पदार्थ का तू चिन्तन कर रहा है – ये सब भगवान् जी का ही उत्पादन हैं । […]

गीता प्रवचन – 472

Posted Posted in Hindi Blog

“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! स्मरण रहे कि स्वार्थमयी क्रियाओं से अन्तःकरण पर संस्कार पड़ने के कारण अन्तःकरण मल, विक्षेप और आवरण के दोषों से दूषित हो जाता है परन्तु वही कर्म जब स्वार्थ-भावना को त्याग कर किये जाते हैं अथवा यज्ञ-बुद्धि से किये जाते है तो वे मल-विक्षेप आवरणों की धज्जियाँ उड़ा कर अन्तःकरण को शुद्ध, निर्मल एवं विमल करने में सहायक हो जाते हैं । इस प्रकार अनेक […]