गीता प्रवचन – 471

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! कुछ गम्भीर मुद्रा में ‘महराजश्री’ ने फ़रमाया कि मानव-जन्म लेकर शरीरों तक ही सीमित रह जाना और खाने-पीने एवं विलासिता को ही अपना उद्देश्य मान लेना शर्म की बात है । मानव जन्म की सार्थकता तो इसमें है कि उस शक्ति की पहचान करते हुए सदा-सदा के लिए अपने-आप को आवाग़मन के चक्कर से मुक्त कर लेना – जिस शक्ति के प्रवेश करने से हमारी […]

गीता प्रवचन – 470

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! आत्मा के कारण से एक छोटी-सी चींटी भी भाग-दौड़ रही होती है, यदि आत्मा नहीं तो विशाल हाथी भी जड़ एवं मुर्दा बन कर पड़ा रहता है । जैसे घोड़े के कारण से ही छकड़े की महत्ता है क्योंकि छकड़ा घोड़े के कारण से ही चल रहा है, घोड़े के बिना वह जहाँ है वहीं का वहीं खड़ा रहता है । अथवा- जैसे बादाम की […]

गीता प्रवचन – 469

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! आइये, अब विचार करें भगवान् जी की आगामी अति कल्याणकारिणी दिव्य विभूति पर – ‘भूतानाम् अस्मि चेतना ।’ (सब प्राणियों की चेतन-शक्ति मैं हूँ ।) अपनी इस दैवी-शक्ति द्वारा श्रीभगवान् जी स्पष्ट कर रहे हैं कि जो चेतन शक्ति सब प्राणियों की जान प्राण है, जिसके कारण से सब में रौनक है, भागना-दौड़ना है तथा और भी समस्त व्यवहार हो रहे हैं, वह चेतन-शक्ति मेरा […]

गीता प्रवचन – 468

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! तो फिर मन में स्वत: ही जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि यदि इनमें सुख नहीं है तो सुख कहाँ है? विचारशीला जनता ! मन ने आज तक जो कुछ भी किया है, कर रहा है और भविष्य में करेगा केवल इसी शान्ति की प्राप्ति के लिए । परन्तु अज्ञानता में ग्रस्त होने के कारण एवम् उचित मार्ग-दर्शन न मिलने के कारण, बुद्धि के आवरणों में […]

गीता प्रवचन – 467

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! अर्जुन के इस प्रश्न को सुन कर भगवान् जी ने तत्काल अपनी मुख्य विभूतियों का वर्णन करना स्वीकार कर लिया और २०वें श्लोक से लेकर निरन्तर एक के पश्चात् एक करके वर्णन करते ही चले गये । अपनी सर्वप्रथम विभूति के निरूपण में ही गीता वक्ता ने कमाल कर दिया जब उन्होंने ‘आत्मा’  को अपनी विशेष शक्ति कह कर स्पष्ट कर दिया कि सब प्राणियों […]

गीता प्रवचन – 466

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“गीता प्रवचन” ग्रन्थ से – प्रवचन-४१ (२५-११-७९) ‘भगवान् की विशेष विभूतियाँ’ बड़भागिन गीतानुयायी मण्डली ! गीता-प्रवचनों की पावन लड़ी में सांयकालीन सत्संग में दिनांक २५-२६/११/७९ को दिये गये प्रवचन जिनमें अर्चनीय, वन्दनीय, माननीय ‘महाराज श्री’ ने विभूतियोग नामक १०वें अध्याय में वर्णित भगवान् जी की कुछ अत्यन्त उपादेय, मार्मिक एवं हृदय-स्पर्शी दिव्य विभूतियों पर स्पष्टीकरण देते हुए कृतार्थ किया – इससे पूर्व अध्याय के प्रारम्भ से ही भगवान् जी ने अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन किया था और इन विभूतियों […]